Shloka 18.65
Gita Press Code 502
मन्मना भव मद्भक्तो मद्याजी मां नमस्कुरु।
मामेवैष्यसि सत्यं ते प्रतिजाने प्रियोऽसि मे॥
man-manā bhava mad-bhakto mad-yājī māṁ namas-kuru |
mām evaiṣyasi satyaṁ te pratijāne priyo 'si me ||
पदच्छेद एवं अन्वय (Word-by-word Anvaya):
मन्मनाः = मेरे में मन लगाने वाला; भव = हो; मद्भक्तः = मेरा भक्त बन; मद्याजी = मेरा पूजन करने वाला; माम् = मुझको; नमस्कुरु = नमस्कार कर; माम् = मुझको; एव = ही; एष्यसि = प्राप्त होगा; सत्यम् = सत्य; ते = तुझसे; प्रतिजाने = प्रतिज्ञा करता हूँ; प्रियः = अतिशय प्रिय; असि = है; मे = मेरा।
गीताप्रेस हिन्दी भावार्थ:
मुझमें मन वाला हो, मेरा भक्त बन, मेरा पूजन करने वाला हो और मुझको नमस्कार कर; ऐसा करने से तू मुझे ही प्राप्त होगा, यह तुझसे मेरी सच्ची प्रतिज्ञा है; क्योंकि तू मेरा अत्यन्त प्रिय है। (गीताप्रेस कोड 502)
English Translation: "Fix your mind on Me, be devoted to Me, worship Me, and offer obeisance unto Me. In this way you will certainly come to Me. I promise you this truly, for you are dearly beloved to Me."
Shloka 18.66
Gita Press Code 502
सर्वधर्मान्परित्यज्य मामेकं शरणं व्रज।
अहं त्वा सर्वपापेभ्यो मोक्षयिष्यामि मा शुचः॥
sarva-dharmān parityajya mām ekaṁ śaraṇaṁ vraja |
ahaṁ tvā sarva-pāpebhyo mokṣayiṣyāmi mā śucaḥ ||
पदच्छेद एवं अन्वय (Word-by-word Anvaya):
सर्वधर्मान् = सम्पूर्ण धर्मों को; परित्यज्य = त्यागकर; माम् एकम् = केवल मेरी; शरणम् = शरण में; व्रज = आ जा; अहम् = मैं; त्वा = तुझको; सर्वपापेभ्यः = सम्पूर्ण पापों से; मोक्षयिष्यामि = मुक्त कर दूँगा; मा शुचः = तू शोक मत कर।
गीताप्रेस हिन्दी भावार्थ:
सम्पूर्ण धर्मों को अर्थात् सम्पूर्ण कर्तव्य कर्मों को मुझमें त्यागकर तू केवल एक मुझ सर्वशक्तिमान परमेश्वर की ही शरण में आ जा। मैं तुझे सम्पूर्ण पापों से मुक्त कर दूँगा, तू शोक मत कर। (गीताप्रेस कोड 502)
English Translation: "Abandon all varieties of dharmas and simply surrender unto Me alone. I shall liberate you from all sinful reactions; do not grieve."